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Barabanki:कोटवा धाम में अधिमास पूर्णिमा पर उमड़ा जनसैलाब प्रमुख पर्यटन स्थल में से एक है कोटवा धाम

Barabanki जिले के सिरौली गौसपुर तहसील क्षेत्र अंतर्गत समर्थ जगजीवन दास साहेब की तपोभूमि कोटवा धाम में पूर्णिमा पर श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ा सुबह होते ही श्रद्धालुओं  का जमावड़ा लग गया।

Barabankiसुबह से ही श्रद्धालुओं का जमावड़ा शुरू हो गया श्रद्धालुओं ने अभरण में आचमन के इसके बाद दर्शन करने के लिए मंदिर में लाइन में लग गए सुबह करें 7:00 बजे ही मंदिर में इतनी भीड़ हो गए कि लोगों को माथा टेकने के लिए घंटा कतर में खड़े रहना पड़ा।

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समर्थ जगजीवन दास साहेब की तपोस्थली कोटवा धाम में गोंडा बहराइच अमेठी रायबरेली सुल्तानपुर बाराबंकी श्रावस्ती लखनऊ सीतापुर सहित देश के कई हिस्सों से भक्तों ने मंदिर में आकर पूजन अर्चन किया।

बड़ी गाड़ी के महंत निलेन्द्र बक्स दास ने बताया कि इस साल 13 पूर्णिमा का योग बना है इसलिए यहां पर अध्यक्ष श्रद्धालु आए हैं

सतनामी परंपरा में संत जगजीवन दास साहेब का जन्म बाराबंकी जिले के सरदहा गांव में सन 1670 के लगभग माना गया है जगजीवन साहेब बचपन से ही गंभीर स्वभाव के थे संत समागम और कीर्तन कार्यक्रम में हुए बड़े उत्साह से हिस्सा लेते थे वह भगवान का चिंतन और साधु सेवा अपना धर्म समझते थे खाली समय में गाय चराते रहते थे।

एक दिन जगजीवन साहब दो संत मिले उन्होंने जगजीवन साहब से चिलम के लिए आग लाने को कहा जगजीवन साहब घर गए आग लाने के लिए उन्होंने सोचा कि संत भूखे होंगे तो उन्होंने दो लौटा दूध लेकर संत को लाकर दे दिया हम संत का नाम था बुल्ला साहब ,गोविंद साहब बुल्ला साहब जगजीवन साहेब की सेवा से बहुत प्रसन्न हुए उन्होंने कहा डरना नहीं जितना दूध ले हो बर्तन में उतना दूध भर गया होगा जगजीवन साहब तुरंत जाकर घर में देखते हैं बात सही thi बस जगजीवन साहब बुल्ला साहब और गोविंद साहब के पीछे दौड़ते हैं जाकर अपने को उनके चरणों में समर्पित कर देते हैं वैराग्य धारण कर लेते हैं

ग्रहस्थजीवन से नाता तोड़ लेते हैं बुल्ला साहब ने जगजीवन साहब को दीक्षा दी और कहा कि तुम पूर्व जन्म के पहुंचे हुए संत हो यही याद दिलाने हम यहां पर आए हुए हैं तुम्हें जन सेवा करनी है वह अपने गुरु बुल्ला साहब सब के आदेश के अनुसार अटो पहाड़ भगवान का चिंतन ध्यान करने लगे कहते थे की भागवत तत्व और गुरु तत्व में कोई अंतर नहीं है वह अन्य सनातनी संतो की तरह कहते थे हे मन! इस जगत में जन्म लेकर जिन्होंने हरि नाम का स्मरण नहीं किया उन्होंने अपना जीवन बिगाड़ डाला जगजीवन साहब ने गुरु की महिमा को बड़ा महत्व दिया है वह कहते हैं “सब चल जाई चल नहीं कोई , सचर अचर ससि माना जगजीवन सतगुरु समरण के चरण रही लटकाना।”

बाराबंकी जिले का प्रमुख पर्यटन स्थल में से एक है कोटवा धाम यहां से देश के कोने कोने से श्रद्धालु बाबा जगजीवन दास साहेब के दर्शन करने आते हैं

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