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G20: भारत की विरासत सभ्यता संस्कृति को निहार रही है दुनिया दिल्ली बनी स्वर्ग

G20:आज से शुरू हो रही जी-20 की बैठक की मेजबानी के लिए भारत बिल्कुल तैयार है।

प्रगति मैदान (भारत मंडपम) और इसके आसपास के क्षेत्र, खासकर, भैंरो मंदिर के सामने खुलने वाले प्रवेश द्वार की खूबसूरती का आलम यह है कि इसे पहचानना भी मुश्किल है। सैकड़ों रंगीन फव्वारे, शेरों, हाथियों व अन्य जानवरों, संगीतकारों से चित्रित मेट्रो के खंभे, पुल व दीवारें भारत के समृद्ध सांस्कृतिक वैविध्य की विरासत को अविश्वसनीय ढंग से प्रदर्शित कर रहे हैं।

कुछ लोग मार्च, 1983 में हुए गुटनिरपेक्ष देशों के शिखर सम्मेलन को इसी श्रेणी में रखेंगे, लेकिन वह समय और मुद्दे बिल्कुल अलग थे।
अगर पुतिन और जिनपिंग सम्मेलन में शिरकत कर रहे होते, तो भी अमेरिकी राष्ट्रपति की मौजूदगी में यूक्रेन मुद्दे पर सर्वसम्मति बनने की संभावना नहीं थी। अमेरिका वैसे भी प्रतिबंधों में ढील देने के संकेत देता नहीं दिख रहा है। इसके बावजूद अगर, व्यापार, बहुपक्षीय बैंकों में सुधार, 60 से ज्यादा देशों की ऋणग्रस्तता, हरित ऊर्जा (भारत तय समय सीमा से नौ साल पहले ही अपने ऊर्जा उत्पादन का 40 फीसदी हिस्सा नवीकरणीय स्रोतों से प्राप्त कर रहा है), डिजिटल बुनियादी संरचना (भारत भुगतान के लिए डिजिटल माध्यम का इस्तेमाल करने वाला सबसे बड़ा देश बनकर उभरा है और कई विकसित देशों ने भी भारतीय यूपीआई में रुचि दिखाई है), खासकर कोविड काल में स्वास्थ्य क्षेत्र में जिस तरह का सहयोग दिखा (भारत ने 60 से ज्यादा देशों को कोविड वैक्सीन और उपचार उपलब्ध कराए), जलवायु परियोजनाओं को वित्त मुहैया कराना, साइबर सुरक्षा और सबसे महत्वपूर्ण, सभी के लिए समावेशी और नवाचारी आर्थिक प्रगति को बढ़ावा देने जैसे विभिन्न क्षेत्रों में तेज सुधार दिख रहे हैं, तो इसका श्रेय भारत की संवाद आधारित कूटनीति और कड़ी मेहनत को मिलना चाहिए।

G20: The world is admiring India's heritage civilization culture, Delhi became heaven.
G20: The world is admiring India’s heritage civilization culture, Delhi became heaven.

वित्त व व्यापार से लेकर स्वास्थ्य, कृषि और संस्कृति तक विभिन्न क्षेत्रों को संभालने वाले विभिन्न देशों के 35 से ज्यादा कार्यसमूह और महत्वपूर्ण कैबिनेट मंत्रियों का पिछले दस महीनों से दिल्ली आना-जाना, और इस दौरान उनकी 29 राज्यों में हुई 200 से ज्यादा बैठकों में सभी जरूरी पहलुओं पर चर्चा हुई। पुतिन और शी जिनपिंग की गैर-मौजूदगी और यूक्रेन के मुद्दे पर मतैक्य की शून्य संभावनाओं के बावजूद, इस बैठक में हरित ऊर्जा, हरित विकास, जलवायु परियोजनाओं के लिए वित्त उपलब्ध कराने का मुद्दा, सहस्राब्दी विकास लक्ष्य (एसडीजी), संयुक्त राष्ट्र और बहुपक्षीय बैंकों में सुधार, बढ़ती ऋणग्रस्तता, महिलाओं के नेतृत्व को बढ़ावा देने वाला विकास, क्रिप्टोकरेंसी, साइबर अपराध, फेक न्यूज, आतंकवाद इत्यादि मुद्दों को समाहित करती एक भारी-भरकम रिपोर्ट जारी करने की तैयारियां पूरी हैं।

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